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महाकाल मंदिर गर्भगृह में जबरन घुसा विधायक का बेटा! जांच रिपोर्ट में कर्मचारियों की लापरवाही उजागर, कार्रवाई की तैयारी…
उज्जैन लाइव, उज्जैन, श्रुति घुरैया:
उज्जैन के विश्वविख्यात महाकाल मंदिर में श्रावण माह के दूसरे सोमवार तड़के जो दृश्य सामने आया, उसने मंदिर प्रशासन से लेकर धार्मिक श्रद्धा तक को झकझोर कर रख दिया। इंदौर-3 से भाजपा विधायक गोलू शुक्ला और उनका बेटा रुद्राक्ष बिना किसी अनुमति के गर्भगृह में घुस गए। भस्म आरती के दौरान, जब मंदिर परिसर में हर गतिविधि अत्यंत अनुशासन और आस्था के वातावरण में होती है, उस दौरान यह जबरदस्ती न केवल नियमों का उल्लंघन थी, बल्कि एक पवित्र स्थल की गरिमा को भी ठेस पहुँचाने वाली थी।
बताया जा रहा है कि रविवार की रात विधायक की कांवड़ यात्रा उज्जैन पहुँची थी। सोमवार सुबह करीब ढाई बजे, भस्म आरती के पट खुलने के तुरंत बाद विधायक गोलू शुक्ला अपने समर्थकों के साथ मंदिर में दाखिल हुए। मंदिर प्रशासन ने पुष्टि की है कि विधायक के नाम पर सीमित अनुमति दी गई थी, लेकिन उनके बेटे रुद्राक्ष को गर्भगृह में प्रवेश की अनुमति नहीं थी। बावजूद इसके, वह भीतर चला गया और जब एक मंदिर कर्मचारी आशीष दुबे ने उसे रोकने की कोशिश की, तो उसने न सिर्फ रोकने से इनकार किया, बल्कि कथित तौर पर कर्मचारी को धमकाया भी।
इस पूरी घटना ने जब तूल पकड़ा तो 24 घंटे के भीतर उज्जैन कलेक्टर ने एक तीन सदस्यीय जांच दल का गठन किया, जिसमें उप प्रशासक एस.एन. सोनी, सुरक्षा अधिकारी जयंत राठौर और सहायक प्रशासक आशीष कलवाड़िया को 7 दिन के भीतर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए। हालांकि 12 दिन बाद भी रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई है। सूत्रों के मुताबिक रिपोर्ट तैयार हो चुकी है और अगले दो दिनों में मंदिर प्रशासक को सौंप दी जाएगी।
रिपोर्ट के मुताबिक, मंदिर के तीन कर्मचारियों की लापरवाही सामने आई है जो घटना के दौरान मौजूद थे और समय रहते विधायक और उनके बेटे को रोकने में असफल रहे। प्रशासनिक स्तर पर माना जा रहा है कि इन कर्मचारियों पर गाज गिरना तय है। हालांकि जब उप प्रशासक से पूछा गया कि विधायक गोलू शुक्ला और उनके बेटे पर क्या कार्रवाई होगी, तो उन्होंने स्पष्ट जवाब देने से इनकार कर दिया।
चौंकाने वाली बात यह भी है कि मंदिर प्रशासन ने स्वयं स्वीकार किया है कि विधायक और उनके बेटे दोनों के पास गर्भगृह में प्रवेश की अनुमति नहीं थी। इसके बावजूद वे समर्थकों के साथ जबरन अंदर घुसे और वहाँ करीब पांच मिनट तक पूजा-अर्चना की। घटना के बाद मंदिर प्रशासन और श्रद्धालु दोनों में असंतोष व्याप्त है।